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July 30, 2005 at 10:59 pm | In Uncategorized | 4 Comments

ये ‘ब्लॉग’ का हिन्दी वर्ज़न ‘चिट्ठा’ शब्द ईज़ाद किसने किया? सच बताऊँ तो आजकल मैं रात के एक दो बजे तक लोगों के ब्लॉग पढ़ता रह्ता हूँ। हिन्दी ब्लॉग की लत लग गयी है। अब अपने चिट्ठे पर भी एक नज़र डाली जाए। दिन भर इतना सोचता हूँ कि ये लिखूंगा वो लिखूँगा- लेकिन लिखने बैठते ही लगता है सब भूल जाता हूं। ख़ैर!

जबसे चिट्ठा जगत से परिचय हुआ है…अचानक सारा अंतरजाल नाकाफी सा लगने लगा है। मैं अभी तक याहू के टूल्स - मेसेंजर- कम्पैनियन-मेल इत्यादि का आदी था…लेकिन इन टूल्स में हिन्दी प्रयोग करने की कोशिश करते ही इनकी घिघ्घी बँध जाती है! लगता है हम सब हिन्दी भाषियों को मिलकर स्वयं ही कुछ करना पड़ेगा।
आज सोच रहा था कि हम सब साधारण भारतीयों में कितने सारे प्रेमचन्द -निराला - सूर- तुलसी- रसखान इत्यादि जैसे टैलेंट बैठे हैं। कहना अतिशयोक्ति न होगी कि अब तो भारत सरकार को एक ‘चिट्ठापीठ’ पुरस्कार भी देना चाहिये। मैंने इतनी उम्दा रचनाएँ देखी हैं चिट्ठों में कि क्या बताऊं। कई नामी-गिरामी साहित्यकार इतनी बेबाक़ी से क्या लिखते होंगे!

अनाम

July 30, 2005 at 3:12 am | In Uncategorized | 2 Comments

गाँव
घर
दुपहरी
बगिया
कबड्डी
पीपल
बरगद
गूलर
बेर
मकई
सरसों
कोंपल
ताल
तलैया
मेंढक
मछ्ली
बच्चे
गुड्डा
गुड़िया
माटी
टाटी
लढ़िया
हल
बैल
गाय
भैंस
दूध
घास
फूस
छप्पर
ट्रैक्टर
सच्चा
बच्चा
किसान
पानी
धान
गेंहूँ
काका
काकी
बाबा
दादी
चूल्हा
चक्की
लकड़ी
आग
सुबह
सूरज
खेत
रेत
शाम
बाल्टी
गगरी
कुआँ
रस्सी
नवयौवना
दरोगा
सरपंच
रेल
इंजन
धुआँ
स्टेशन
पुरवैया
मन्दिर
शादी
दूल्हा
बारात
नाच
बाजा
क्रीम
पाउडर
बिन्दिया
गहने
बनिया
धुनिया
नाई
कुम्हार
धोबी
बारिश
बूँदें
पानी
आम
धान
कोयल
साँप
सियार
बाँस
पगडंडी
सड़क
सपने
अपने
बहना
बिटिया
बचपन
तड़पन
आंसू
असहाय
मैं!

अतुल अरोरा जी से बात

July 28, 2005 at 12:47 am | In Uncategorized | 3 Comments

आज अतुल अरोरा जी से बात हुई। बहुत प्रसन्नता हुई।

आज का दिन

July 23, 2005 at 10:40 pm | In Uncategorized | 2 Comments

ज़्यादतर समय भारत में अपने परिवार से वार्तालाप करने में बीता। दोपहर में वालमार्ट और सुपरमार्केट में बीता! करीब 5 घंटे ऐसे ही बीत गये। कार में लाइसेंस प्लेट लगानी है लेकिन पेंच है कि फिट ही नहीं हो रहा!
ड्राइविंग़ टेस्ट में फेल हो गया। सब कुछ ठीक ठाक था, सब्कुछ कर लिया…आखिर में एक ‘1 वे’ पर दाहिने मुड़ गया! कहीं ऐसा कोई चिह्न नहीं था कि दाहिने मुड़्ना मना है। यह तो एक चाल थी। परीक्षक एक औरत थी जो पागल किस्म की थी। मुझे पहले ही लग रहा था कि यह मुझे पास नहीं करने वाली। खैर!
रात के पौने 2 बज गये…सो जाओ!

शाब्दिक स्वतंत्रता संग्राम

July 23, 2005 at 1:23 am | In Uncategorized | No Comments

आजकल इतनी सारी हिन्दी और इतने लेखक देखकर लग रहा है कि जैसे अंग्रेज़ी से मुक्ति पाने का संग्राम छिड़ गया हो। वीर तुम डटे रहो!!
आजकल सारा समय अंतरजाल पर और बाकी लोगों को हिन्दी लिखना सिखाने में लगा रहता है। यह देखकर खुशी होती है कि इतने लोगों का मन है हिन्दी में बातें करने में! जहां तक हो सकता है मैं अंतरजाल पर हिन्दी में ही वार्तालाप करने लगा हूँ। अंग्रेज़ी जैसी अवैज्ञानिक भाषा की ज़रूरत किसे है आखिर!

आने वाले चिट्ठे

July 21, 2005 at 12:12 am | In Uncategorized | No Comments

यह कच्चा चिट्ठा (बीटा वर्जन) है , इसलिए कृपया मेरी किसी बात को सीरियसली मत लीजिएगा! ऑफलाइन बहुत कुछ लिखने को सोचता हूँ, परंतु ऑनलाइन आते ही भूल जाता हूं। कुछ नये चिट्ठे बनाने का प्लान है। क्रमरहित विचारों के लिये एक चिट्ठा, साहित्यिक रचनाओं के लिये एक और। एक और अपनी आत्मकथा के लिये! जी हाँ, इससे पहलेकि मेरी कथा लिखने का सौभाग्य किसी और को प्राप्त हो..मैं स्वयं ही यह पुण्य कार्य कर लेता हूँ! :-)

किचन का कच्चा चिट्ठा!

July 20, 2005 at 10:14 pm | In Uncategorized | 2 Comments

आज चिट्ठा किचन में ही लिखा! कारण कई हैं फिर कभी बताऊंगा!दाल चावल बनाने की कोशिश की। दाल कुछ ज़्यादा ही गल गयी। खाने लायक नहीं है फिर भी खानी पड़ेगी। खैर!

हेलो माइक टेस्टिंग…123

July 20, 2005 at 9:53 pm | In Uncategorized | No Comments

ज़ी हां यह मेरे चिट्ठे का बीटा वर्ज़न है। अगले कुछ दिनों में बहुत परिवर्तन आएगा इसमें।

हिन्दी और लाइसेंस!

July 20, 2005 at 8:06 pm | In Uncategorized | No Comments

आजकल हिन्दी में ही सोचने लगा हूं (मतलब क्या हुआ? सोचने की भी कोई भाषा होती है?) । सुबह ऑफिस को जाते समय जाने कितने विचार आए, वो भी विशुद्ध हिन्दी में! हिन्दी में लिखने का लाइसेंस मिल गया है! शुक्रवार को वाहन चालन की परीक्षा है। भारत में था तभी कैलिफोर्निया का लाइसेंस एक्स्पायर हो गया, अतः डीएमवी ने बोला फिर से ड्राइविंग टेस्ट देने को। फेल होने का कोई चांस नहीं है! वरना दो हफ्ते तक ऑफिस कैसे जाऊँगा? 2 हफ्ते में आईडीपी के 60 दिन भी पूरे होने वाले हैं! इन लोगोँ ने बोला है कि डीएमवी जाते समय मेरे साथ एक लाइसेंसधारी ड्राइवर होना चाहिये! कैसे कैसे नियम! इतने दिनों से गाड़ी चला रहा हूँ इस देश में!
हिन्दी इन्डिक आई एम ई का कुंजीपटल अत्यधिक सरल है।

थमा हुआ दरिया

July 19, 2005 at 10:38 pm | In Uncategorized | 2 Comments

इतना सब कुछ है लिखने को…परन्तु धीमा हिन्दी टंकण आडे आ जाता है। Input mode Hindi करके Microsoft On Screen Keyboard की सहायता लेकर लिख रहा हूं। बाकी सब इतना सब कुछ जाने कैसे लिख रहे हैं। फोनेटिक कीबोर्ड की सहायता लेना अच्छा नहीं लगता। हिंदी को अंगरेजी का गुलाम क्यों बनाएं। वैसे ईस्वामी जी को हग बनाने पर बधाई एवं साधुवाद। इतने सारे कमेंट्स देखकर अच्छा लगा। मन तो बहुत है लिखने का पर आज समय नहीं बचा। सबका जवाब दूंगा।

ब्लाग के चक्कर में खाना नहीं खाया अभी। मैगी जिंदाबाद! बीवी , जोकि संप्रति भारत में है, पढेगी तो बहुत दुःखी होगी। चार साल तक उसके हाथ का बना खाना खाने के बाद कुछ और नहीं भाता।
कल शाम आनलाइन नहीं हो पाऊंगा।

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