थमा हुआ दरिया

July 19, 2005 at 10:38 pm | In Uncategorized | 2 Comments

इतना सब कुछ है लिखने को…परन्तु धीमा हिन्दी टंकण आडे आ जाता है। Input mode Hindi करके Microsoft On Screen Keyboard की सहायता लेकर लिख रहा हूं। बाकी सब इतना सब कुछ जाने कैसे लिख रहे हैं। फोनेटिक कीबोर्ड की सहायता लेना अच्छा नहीं लगता। हिंदी को अंगरेजी का गुलाम क्यों बनाएं। वैसे ईस्वामी जी को हग बनाने पर बधाई एवं साधुवाद। इतने सारे कमेंट्स देखकर अच्छा लगा। मन तो बहुत है लिखने का पर आज समय नहीं बचा। सबका जवाब दूंगा।

ब्लाग के चक्कर में खाना नहीं खाया अभी। मैगी जिंदाबाद! बीवी , जोकि संप्रति भारत में है, पढेगी तो बहुत दुःखी होगी। चार साल तक उसके हाथ का बना खाना खाने के बाद कुछ और नहीं भाता।
कल शाम आनलाइन नहीं हो पाऊंगा।

Coincidences galore! आश्चर्यजनक किंतु सत्य

July 19, 2005 at 9:56 pm | In Uncategorized | No Comments

परमेश्वर की महिमा! तरुण जी का ब्लाग तो किसी लिंक द्वारा मिला। आश्चर्यजनक किन्तु सत्य - जोशी को मैं पहले से ही जानता हूं। वे मेरी कंपनी में ही कार्ययरत हैं एवं मेरे पडोसी भी हैं। बहुत ही भले मानस हैं। सेटल करने में मेरी बहुत सहायता की।

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