शाब्दिक स्वतंत्रता संग्राम
July 23, 2005 at 1:23 am | In Uncategorized | Leave a Commentआजकल इतनी सारी हिन्दी और इतने लेखक देखकर लग रहा है कि जैसे अंग्रेज़ी से मुक्ति पाने का संग्राम छिड़ गया हो। वीर तुम डटे रहो!!
आजकल सारा समय अंतरजाल पर और बाकी लोगों को हिन्दी लिखना सिखाने में लगा रहता है। यह देखकर खुशी होती है कि इतने लोगों का मन है हिन्दी में बातें करने में! जहां तक हो सकता है मैं अंतरजाल पर हिन्दी में ही वार्तालाप करने लगा हूँ। अंग्रेज़ी जैसी अवैज्ञानिक भाषा की ज़रूरत किसे है आखिर!
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