अनाम

July 30, 2005 at 3:12 am | In Uncategorized | 2 Comments

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तड़पन
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मैं!

2 Comments »

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  1. Wonderful. It is amazing style of writing and conveying something, it can be a great advertisement concept.

  2. रवि जी, बहुत बहुत धन्यवाद! सच तो यह है कि मैने ये देख है कि जित्ने कम शब्दों में कुछ लिखा बोला जाए, उतना ही असरदार होता है। बस, मैने सोच अकि लोगों के सामने एक नया प्रयोग किया जाए, – बस एक शब्द प्रति पंक्ति! अब यह गद्य है कि पद्य, मालूम नहीं, लेकिन लगता है कि एक शब्द में न भी ताकत है बहुत कुछ कहने की। विज्ञापन की दुनिया में ये तरीक़ा कैसे प्रयोग कर सकते हैं, मुझे बतायें। वैसे मेरी ओर सी आपके नये प्रयास पर शुभकामनायें।


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