मेरी पसन्द के कुछ शेर
February 5, 2006 at 12:43 am | In Uncategorized | Leave a Comment(शायरों के नाम नहीं मालूम)
किसी की रहमतों का तलबग़ार नहीं हूं-
बाज़ार से निकला हूँ ख़रीददार नहीं हूं
————————
मेरी हिम्मत को सराहो,मेरे हमराही बनो-
मैने इक शम्मा जला दी है हवाओं के ख़िलाफ
————————
हवा घरों में कहाँ इतनी तेज़ चला करती है-
मगर उसे तो मेरा दिया बुझाना था
————————-
सबके होंठों पे तबस्सुम था मेरे क़त्ल के बाद-
जाने क्यों रो रहा था क़ातिल तन्हा
————————-
No Comments Yet »
RSS feed for comments on this post. TrackBack URI
Leave a comment
Blog at WordPress.com. | Theme: Pool by Borja Fernandez.
Entries and comments feeds.