सुविचार

July 31, 2006 at 9:45 pm | In चिंतन, सुविचार | No Comments

“हम समस्याओं को उसी मानसिकता का उपयोग करके नहीं हल कर सकते जिस मानसिकता के द्वारा हमने उन समस्याओं को उत्पन्न किया है।”

-अल्बर्ट आइन्स्टीन

चिट्ठा-शेर

July 29, 2006 at 12:30 am | In Uncategorized | 2 Comments

अर्ज़ किया है:

वो आए अपने ब्लाग पर खुदा की कुदरत है-

कभी हम अपना टेम्प्लेट तो कभी पोस्टें देखते!

ग़ज़ल

July 23, 2006 at 9:23 pm | In नया-नवेला, ग़ज़ल | 6 Comments

जलता रहने दे इन चराग़ों को
अँधेरों का हिसाब बाक़ी है

रात ये खत्म नहीं होती है
दीद-ए-माहताब (१) बाक़ी है

कुछ भी खोने का तू ग़म मत कर
क़त्ल-ए-क़ायनात बाक़ी है

ज़ुल्म तेरे नहीं चल पाएँगे
जहाँ में इंक़िलाब बाक़ी है

फ़िज़ाँ में अब तलक खुशबू सी है
चमन में एक गुलाब बाक़ी है

कहते हैं लोग के बदी (२)मत देख
हम में होशो-हवाश बाक़ी है

खेल ये ख़त्म यूँ नहीं होगा
अभी अपना ज़वाब बाक़ी है

कुछ भी कह मुझको बेवफ़ा मत कह
अभी वो ही ख़िताब बाक़ी है

बचा के रख तू आबरू अपनी
अभी तेरा रुआब बाक़ी है

कहता रह दास्तान ये अपनी
इश्क़ की इक किताब बाक़ी है

‘ज़श्न’ मत तोड़ अभी पैमाना
बोतलों में शराब बाक़ी है

(१)- चाँद का दिखना
(२)- बुराई

चिट्ठा-शेर

July 17, 2006 at 9:59 pm | In हास्य-व्यंग्य | 5 Comments

मुलाहिज़ा फ़रमाइये-

उनकी हर लाइन पर दस कमेन्ट आते है‍-

हम रात भर लिखते हैं तो चर्चा नहीं होता! :)

रंग

July 15, 2006 at 10:53 pm | In Uncategorized | No Comments

इस हफ़्ते

July 15, 2006 at 12:53 am | In चिंतन, समसामयिक | No Comments

इस सप्ताह मुम्बई विस्फोट के समाचार ने बहुत दुखी कर दिया…आखिर कब खत्म होगा ये सब?२००-२५० लोग…क्या कम हैं? भारत कीम ज़बूरियां क्या है?? दो सैनिकों का अपहरण हुआ और इज़्रायल ने हिज़्बोल्ला पर चढ़ाई कर दी। जाने कहां थमेगा ये सब! यहां अमरीका मे‍ तो सुबह शाम इरान, ईराक, इस्रायल, सीरिया सुनाई देता है समाचारो‍ मे‍ हर मिनट!

“विस्फोट पाकिस्तान ने करवाया है”…अरे रोको उसे!!

लेबनान की सरकार कह रही थी कि हिज़बुल्ला उसके कन्ट्रोल मे‍ नही‍ है…तो इसरायल ने बोला ..तुम नही‍ कर सकते तो हम कर देते है‍।  हालांकि पाकिस्तान के परमाणविक देश होने के कारण समीकरण यहां अलग है…पर फ़िर भी…कुछ करना पड़ेगा भाई!

मुझे लग रहा है कि इन पागलो‍ का अगला निशाना बैंगलोर है।

खैर..आजकल व्यस्तताओ‍ के चलते चिट्ठा लेखन-पठन सामान्यतया सप्ताहान्त पर ही कर पाऊंगा…आशा है आपका सहयोग यथावत बना रहेगा…और यदि आपके चिट्ठे पर मेरी टिप्पणी एक हफ़्ते बाद आती है तो वजह समझ जाइयेगा…यहां पर आते रहिये!

पहेली के उत्तर

July 11, 2006 at 10:17 pm | In मनोरंजन | No Comments

पहेली के उत्तर यह रहे:

१. “मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता”  - सन्तूर सोप
२. “पहला प्यार, लाए जीवन में बहार…” - जय साबुन
३. “राजू, तुम्हरे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं” - डाबर दन्तमंजन
४. “… इसके झाग ने जादू कर दिया…” - निरमा डिटर्जेन्ट टिकिया
५. “…खोलो दबाओ, ब्रश पर लगाओ…मोड कर रखो, फिर काम में लाओ..” - कोल्गेट का छोटा पैकेट
६. “ज़माने के साथ चलो, … अपनाओ” - वैमिकोल (सईद जाफ़री का ऐड)
७. “तन्दुरुस्ती की रक्षा करता है…”- लाइफ़बॉय
८. “राजू(?) की मां ललिता जी ठीक कहती हैं..” - सर्फ़
९. (अन्ग्रेज़ी में) “सर…व्हिच शेविंग क्रीम डू यू यू़ज़्?” - गोदरेज शेविंग क्रीम
१०. “…दा ज़वाब नहीं” - पामोलिव
११. “बच्चे बूढे और जवान, पहनें… बनियान” - यंग इंडिया

१२. “ये अन्दर की बात है” -लक्स अन्डरवियर बनियान
१३. “… की खरीददारी में ही समझदारी है” - सर्फ़
१४. “दूरियाँ नज़दीकियाँ बनीं…” - कोल्गेट टूथ्पेस्ट
१५. “…आयुर्वेदिक जडी-बूटियों से बना सम्पूर्ण स्वदेशी…” - विक्को वज्रदन्ती
१६. “…बस दो मिनट…”  - मैगी
१७. “जो बीवी से करते प्यार..वो …से कैसे करें इन्कार!” -प्रेस्टिज
१८. “… की सीटी बजी, खुशबू ही खुशबू उडी..” - हॉकिन्स
१९. “…की क्या खूब लिखाई…” - नटराज
२०. “…हाँ स्पेशल है वो…मेरी ज़िन्दगी…” - रेड लेबल
२१. “…दाम में कम, काम में दम…, …से धोते कपडे हम!” - प्लस
२२. “हल्दी चंदन का उबटन लगायें सखियाँ…तेरी काया को कंचन बनायें सखियाँ…” - विक्को टर्मरिक
२३. “…सोना सोना, अहा …” - रेक्सोना
२४. “उसकी कमीज़ मेरी कमीज़ से ज़्यादा सफेद कैसे..” - सुपर  रिन

पहला ईनाम: निधि

दूसरा ईनाम:  सागर चन्द नाहर

बूझो तो जानें!

July 4, 2006 at 11:13 pm | In मनोरंजन | 10 Comments

नीचे दूरदर्शन पर आने वाले कुछ पुराने विज्ञापनों की कुछ पन्क्तियां दी हुई हैं- अपनी यादों को टटोलिये, और उनसे सम्बन्धित उत्पाद का नाम बताइये |
१. “मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता”
२. “पहला प्यार, लाए जीवन में बहार…”
३. “राजू, तुम्हरे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं”
४. “… इसके झाग ने जादू कर दिया…”
५. “…खोलो दबाओ, ब्रश पर लगाओ…मोड कर रखो, फिर काम में लाओ..”
६. “ज़माने के साथ चलो, … अपनाओ”
७. “तन्दुरुस्ती की रक्षा करता है…”
८. “राजू(?) की मां ठीक कहती हैं..”
९. (अन्ग्रेज़ी में) “सर…व्हिच शेविंग क्रीम डू यू यू़ज़्?”
१०. “…दा ज़वाब नहीं”
११. “बच्चे बूढे और जवान, पहनें… बनियान”
१२. “ये अन्दर की बात है”
१३. “… की खरीददारी में ही समझदारी है”
१४. “दूरियाँ नज़दीकियाँ बनीं…”
१५. “…आयुर्वेदिक जडी-बूटियों से बना सम्पूर्ण स्वदेशी…”
१६. “…बस दो मिनट…”
१७. “जो बीवी से करते प्यार..वो …से कैसे करें इन्कार!”
१८. “… की सीटी बजी, खुशबू ही खुशबू उडी..”
१९. “…की क्या खूब लिखाई…”
२०. “…हाँ स्पेशल है वो…मेरी ज़िन्दगी…”
२१. “…दाम में कम्, काम में दम…, …से धोते कपडे हम!”
२२. “हल्दी चंदन का उबटन लगायें सखियाँ…तेरी काया को कंचन बनायें सखियाँ…”
२३. “…सोना सोना, अहा …”
२४. “उसकी कमीज़ मेरी कमीज़ से ज़्यादा सफेद कैसे..”

पुनश्च

July 4, 2006 at 10:26 pm | In Uncategorized | No Comments

कुछ अत्यन्त ही महत्वपूर्ण व्यक्तिगत घटनाओं के कारण मैं चिट्ठाजगत से पिछ्ले कुछ महीनों से दूर था| बिन बताए जाने के लिये क्षमा-प्रार्थी हूँ| पिछले दो-तीन महीनों में जीवन-समुद्र की लहरों ने कभी इस पार ला पटका, कभी उस पार, जिसे शब्दों में व्यक्त करना दुष्कर है| अतुल से आज की बात-चीत ने ताज़ा घटनाओ से परिचित कराया, और अब मैं फिर से कुछ लिखने का प्रयास करूँगा|

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