बूझो तो जानें!

July 4, 2006 at 11:13 pm | In मनोरंजन | 10 Comments

नीचे दूरदर्शन पर आने वाले कुछ पुराने विज्ञापनों की कुछ पन्क्तियां दी हुई हैं- अपनी यादों को टटोलिये, और उनसे सम्बन्धित उत्पाद का नाम बताइये |
१. “मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता”
२. “पहला प्यार, लाए जीवन में बहार…”
३. “राजू, तुम्हरे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं”
४. “… इसके झाग ने जादू कर दिया…”
५. “…खोलो दबाओ, ब्रश पर लगाओ…मोड कर रखो, फिर काम में लाओ..”
६. “ज़माने के साथ चलो, … अपनाओ”
७. “तन्दुरुस्ती की रक्षा करता है…”
८. “राजू(?) की मां ठीक कहती हैं..”
९. (अन्ग्रेज़ी में) “सर…व्हिच शेविंग क्रीम डू यू यू़ज़्?”
१०. “…दा ज़वाब नहीं”
११. “बच्चे बूढे और जवान, पहनें… बनियान”
१२. “ये अन्दर की बात है”
१३. “… की खरीददारी में ही समझदारी है”
१४. “दूरियाँ नज़दीकियाँ बनीं…”
१५. “…आयुर्वेदिक जडी-बूटियों से बना सम्पूर्ण स्वदेशी…”
१६. “…बस दो मिनट…”
१७. “जो बीवी से करते प्यार..वो …से कैसे करें इन्कार!”
१८. “… की सीटी बजी, खुशबू ही खुशबू उडी..”
१९. “…की क्या खूब लिखाई…”
२०. “…हाँ स्पेशल है वो…मेरी ज़िन्दगी…”
२१. “…दाम में कम्, काम में दम…, …से धोते कपडे हम!”
२२. “हल्दी चंदन का उबटन लगायें सखियाँ…तेरी काया को कंचन बनायें सखियाँ…”
२३. “…सोना सोना, अहा …”
२४. “उसकी कमीज़ मेरी कमीज़ से ज़्यादा सफेद कैसे..”

पुनश्च

July 4, 2006 at 10:26 pm | In Uncategorized | Leave a Comment

कुछ अत्यन्त ही महत्वपूर्ण व्यक्तिगत घटनाओं के कारण मैं चिट्ठाजगत से पिछ्ले कुछ महीनों से दूर था| बिन बताए जाने के लिये क्षमा-प्रार्थी हूँ| पिछले दो-तीन महीनों में जीवन-समुद्र की लहरों ने कभी इस पार ला पटका, कभी उस पार, जिसे शब्दों में व्यक्त करना दुष्कर है| अतुल से आज की बात-चीत ने ताज़ा घटनाओ से परिचित कराया, और अब मैं फिर से कुछ लिखने का प्रयास करूँगा|

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