गूगल मैप्स में मेरा घर!
August 31, 2006 at 9:27 pm | In Uncategorized | 37 Commentsनहीं, मैं अमेरिका वाले घर की बात नहीं कर रहा…आज गूगल मैप्स(’अर्थ’ नहीं) में अपना लखनऊ वाला घर देखा…मैं लखनऊ में ही पला बढ़ा हूं…आज गूगल मैप्स पर अपने घर की छत, सामने वाली कालोनी, चौराहे, अपने बचपन का स्कूल,मन्दिर, पार्क, सड़कें, पानी की टंकियाँ, पेट्रोल पम्प, क्या-क्या नहीं देखा…और इमोशनल तो होना ही था…! पिछले तीन घन्टे से लगा हुआ हूँ गूगल मैप्स साइट पर। कुच्ह महीने पहले गूगल साइट पर लखनऊ का इतना डिटेल्ड मैप नहीं था। तो चलिये आप भी लग जाइये अपना ‘घर’ ढूंढने!
नहीं, मेरा मतलब कुछ और था!
August 27, 2006 at 9:22 am | In Uncategorized | 3 Commentsमैं, वर्डप्रेस से वापस ब्लाग्स्पाट पर जा रहा हूं। मुझे वर्ड्प्रेस बिलकुल रास नहीं आया। अपने पुराने ब्लाग्स्पाट के चिट्ठे पर तो जा नहीं सकता..चूंकि, वहां ‘इम्पोर्ट’ की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यह नया चिट्ठा बनते ही सबको खबर करूंगा!
धन्यवाद!
-’अन्तर्मन’
अलविदा
August 25, 2006 at 11:38 pm | In Uncategorized | 9 Commentsयह चिट्ठा यहां पर समाप्त होता है।आप सबकी हौसला=आफ़ज़ाई के लिये शुक्रिया! मौक़ा लगा तो फ़िर कभी मिलेंगे!
वर्ड्प्रेस से जाने का इरादा फ़िलहाल टल गया है…! अभी तो यहीं मिला करेंगे!
एक और ग़ज़ल
August 2, 2006 at 9:49 pm | In ग़ज़ल | 1 Commentचलिये, एक और झेलिये -
किया था जिसने वादा के चलेगा साथ मंज़िल तक
आज वो हमसफ़र नहीं दिखता
जिसके साए में नींद आ जाए
इधर अब वो शज़र नहीं दिखता
क़त्ल कितने भी होते रहते यूं ही आज दुनिया में
पर कोई चश्मे-तर नहीं दिखता
नज़रंदाज़ जैसा कर रहा है वो मगर मेरे
इश्क़ से बेख़बर नहीं दिखता
न जाने क्या कमी-सी रह गई मेरी इबादत में
दुआओं का असर नहीं दिखता
जाने कितनी मंज़िलें आईं-गयीं हैं पर
ख़त्म होता सफ़र नहीं दिखता
फ़तह हासिल जो करले ताक़ पर रख कर उसूलों को
‘ज़श्न’ मे वो हुनर नही दिखता
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