चिट्ठे जो लिखे नहीं गए…
March 1, 2007 at 12:45 am | In Uncategorized | 10 Comments(बुरा न मानो…:-)
(नोट: उपर्युक्त वाक्य फ़िर से पढ़ें )
हमें इन चिट्ठों का इन्तज़ार है…और रहेगा!
फ़ुरसतिया: गागर में सागर
जीतू: संज़ीदा लेखन के नए आयाम
अतुल: अविरत चिट्ठा लेखन के १०१ फ़ायदे
ईस्वामी: अन्कंट्रोवर्शियल ब्लॉग लेखन कैसे संभव
रवि रतलामी: अव्यावसायिक चिट्ठा लेखन की समसामयिकता
समीर भाई: गिरते बालों को फ़िरसे कैसे उगाएँ
आशीष: कन्याओं से मित्रता बढ़ाने के गुर
(होली की बधाइयाँ…)
10 Comments »
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Hi
Comment by javimonorra — March 1, 2007 #
इस वर्ष इस सूची में और बढ़ोतरी हो जाएगी.
आप सूची अपडेट करते रहें
Comment by संजय बेंगाणी — March 1, 2007 #
अईयो, ये अमको बदनाम करता है जे, अम आजकल बहोत शरीफ बन गया है जे, अम जया अम्मा का कसम काकर (खाकर) बोलता है जे अब अम अब कन्याओ से दूर रहता है जे।
अबी तो टीक है बाद मे ऐसा किसी को नई बताने का जे।
वैसे तुम बोलता तो अम इस पर लिकेगा , जरूर लीकेगा
Comment by आशीष — March 1, 2007 #
और शायद कभी लिखे भी नहीं जाएंगे…
अव्यावसायिक चिट्ठा लेखन की समसामयिकता!
बहुत ही मौलिक! बहुत ही नया!!
Comment by रवि — March 1, 2007 #
होली की मुबारकबाद तो ये लो!!
गिरते बालों को फ़िरसे कैसे उगाएँ
अमा यार, यही मालूम होता तो उस लेख की जरुरत कहाँ थी?
फिर भी संतों से ज्ञान मांगा गया है तो जरुर मिलेगा. कोई भक्त दरबार से निराश लौट जाये, न न!! ऐसा हम नहीं होने देंगे. जल्द ही प्रवचन आयोजित किया जायेगा.
Comment by समीर लाल — March 1, 2007 #
अरे भाई, ये सभी लोग तो बार-बार इन्हीं लेखों की प्रतीक्षा में चिट्ठाकारी में लगे हैं, वरना इन्हें क्या था जो यहाँ मगजमारी करते।
बुरा न मानो…
Comment by राजीव — March 1, 2007 #
जीतू भाई का संजीदा लेखन अभी गया तेल लेने, (वही जिससे समीर लाल, बाल उगाएंगे) होली के मौसम मे तो ऐसे ही चलेगा।
आपको भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं। आपकी होली रंगीन रहे, लोग आपसे आपका नाम पूछ पूछ कर रंग लगाए, नही समझे ( अरे गिरिराज से पूछो, बहुत झेले है वो)
Comment by Jitu — March 1, 2007 #
Comment by ई-स्वामी — March 1, 2007 #
हमारी पहली पोस्ट देखो भई! कुल जमा नौ शब्द हैं। अब इससे भी छोटी पोस्ट तो आलोक ही लिख सकते हैं!
Comment by अनूप शुक्ला — March 2, 2007 #
संजय जी: ये शुरुआत है!
आशीष:लीको!
रवि: धन्यवाद! सही पहचाना!
समीर: इन्तज़ार है प्रवचन का!
राजीव: अरे मज़ाक कर रहा हूँ यार!
जीतू: लगे रहो!
स्वामी: वाकई!
शुक्ला जी: पहली पोस्ट कौन देखता है..वो तो बाकियों के वज़न में कब की दब गई। अरे मज़ाक कर रहा हूं, आप तो सबूत भी जुटा लाए!
बंधुओं, अपनी स्टाइल में अपने चिट्ठे लिखते रहें।
Comment by antarman — March 3, 2007 #