पारसी एवं हिन्दू धरम – जतीन्द्र मोहन की पुस्तक
April 9, 2007 at 10:09 pm | In Uncategorized | 1 Commentजतीन्द्र मोहन चटर्जी की इस पुस्तक (http://www.avesta.org/chatterj_opf_files/slideshow.htm) को पढ़ कर देखिये। इसके प्रिफ़ेस में काफ़ी रोचक जानकारी है – बाकी पुस्तक में पारसियों की धर्म-पुस्तक ’गाथा’ का अनुवाद किया गया है।
चटर्जी साहब के अनुसार :
१. वेदों में वर्णित ’वरुण’ जो कि असुरों के देव हैं, पारस ’सुर’ शब्द भारत के वासियों के लिये प्रयुक्त होता था। सुर के देव ’इन्द्र’ थे…जो कि वरुण के मित्र थे। (वरुण-इन्द्र की एक साथ उपासना होती थी)। इन्द्र देव पारसी धर्म में ’मित्र’ के रूप में जाने जाते थे। ’असुर’शब्दशुरुआत में एक आदरणीय शब्द था जो कालांतर में ’दानव’ के लिये प्र्युक्त होने लगा।
२. ’अहुरा माज़्दा’ जो कि पारसीयों के ईश्वर हैं – वेदों में ’हरि मेधा’ के नाम से जाने जाते हैं।
३. वेदों में वर्णित परशुुराम सम्भवतः पारसी महारथी थे।
४. पारसी (असुर) मूर्ति-पूज के विरुद्ध थे एवम ’सुर’ मूर्ति-पूजक थे। देवासुर संग्राम ् इन्ही दोनों के बीच का ्युद्ध है।
इसके अलावा इस पुस्तक में अन्य बहुत सी बातें लिखी हैं। आप ही अपने विचार बताएं।
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दिल की कलम से
नाम आसमान पर लिख देंगे कसम से
गिराएंगे मिलकर बिजलियाँ
लिख लेख कविता कहानियाँ
हिन्दी छा जाए ऐसे
दुनियावाले दबालें दाँतो तले उगलियाँ ।
NishikantWorld
Comment by Nishikant Tiwari — August 31, 2007 #