मैं कहां था

सितम्बर 17, 2005 को 9:46 अपराह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

मैं पिछले कुछ दिनों से अपने परिवार के साथ व्यस्त था। कई मूवीज़ भी देखीं – परिणीता, दस, बंटी और बबली, नो एंट्री, और कल देखी सलाम नमस्ते। समय कम था ..पर फिर भी लोगों के ब्लॉग पढ़ने भर के लिये वक़्त निकाल लेता था। ज़ल्द ही वापस आऊंगा।
पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी मेरे ब्लॉग के अस्तित्व के बारे में। मेरे चिट्ठे की गलत कड़ी थी कुछ लोगों के पास शायद।

आज का दिन

सितम्बर 17, 2005 को 9:40 अपराह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

आज का दिन न्यूयॉर्क में बीता

अमेरिका में भारतीय

सितम्बर 1, 2005 को 10:02 अपराह्न | Posted in Uncategorized | 1 टिप्पणी

आजकल न्यूयार्क टाइम्स में लग्भग हर रोज़ भारत् या भारतीयों के बारे में खबरें देखने को मिलती हैं। कुछ दिन पहले बैंगलोर के कम्पनियों के भवनों के बारे में लेख आया था..फिर परसों मुख्य पृष्ठ पर सबसे पहली खबर थी बैंगलोर/भारत में घूसखोरी के बारे में। फिर कल व्यापार के सेक्शन के पहले पन्ने पर खबर थी एक सिख भारतीय के सिटीबैंक के शीर्ष पद पर नियुक्त होने की। आज खेल सेक्शन में सानिया के बारे में एक छोटा सा लेख आया है। समय मिल तो स्कैन कर के यहां प्रस्तुत करूगा।
सबसे बड़ी बात है कि विश्व की बड़ी बड़ी मुद्राओं के बगल में भारतीय रूपये का भी विनिमय मूल्य लिखा रहता है। इसका मतलब लोगों को भारतीय बज़ार में गहरी रुचि है। इससे पहले किसी विदेशी समाचार पत्र में भारतीय रूपये की विनिमय दर नहीं देखी। खैर ..आजकल तो कैट्रीना नाम के हरीकेन की वजह से दक्षिण पूर्व अमेरिका में भारीए तबाही मची हुई है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि अमेरिका में आपदा के समय में लगभग वही हाल होता है जैसा कि भारत में। लाखों बेघर हैं..कई दिनों से…और कहीं कोई सहारा नहीं । लूटपाट, बलात्कार इत्यादि सब कुछ हो रहा है इस समय न्यू ऑर्लियंस शहर में जो कि सबसे बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मुझे समाचारों में सिर्फ अश्वेत दिखाई पड़ते हैं । कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी वजह से कुछ चाही अनचाही उपेक्शा मिल रही हो इस शहर को। पिछली बार अमेरिका में रहता था तो मैं अमेरिका को जादुई जिन्न की तरह समझता था…कि यहां हर चीज़ अच्छी है, बिल्कुल जादुई तरीके से..पर इस बार बहुत सी सच्चाइयाँ सामने आ रही हैं।

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