सूरज

नवम्बर 26, 2005 को 4:43 अपराह्न | Posted in Uncategorized | 2 टिप्पणियाँ



ठंड की एक शाम का सूरज

पहला हिमपात

नवम्बर 24, 2005 को 12:14 अपराह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

आज सुबह यहाँ पर इस वर्ष का पहला हिमपात ( स्नो फाल) हुआ। यह चित्र मेरी बालकनी के सामने का है, जो कि मैंने आज सुबह क़रीब 7 बजे लिया।

मेरे कुछ शेर

नवम्बर 23, 2005 को 8:56 अपराह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

मैंने ये शेर कुछ महीने पहले लिखे थे, पर व्यस्तता के कारण ग़ज़लें पूरी नहीं कर पाया…खैर..यह रहे कुछ शेर –

चाहे जितनी दूरियाँ कर दे ज़माना बीच में,
कुछ तुम चलो, कुछ हम चलें, फासले मिट जाएँगे।

ज़िन्दगी का ये सफर कितना भी लम्बा हो मगर,
कुछ तुम कहो, कुछ हम सुनें, रास्ते कट जाएँगे।

—*—-*—–*——*—–*———*—-

यूँ तो जिए ये ज़िन्दगी हम अपनी ज़ोश से,
ताउम्र मगर हम रहे ख़ानाबदोश से।

यूं दीनो-दुनिया का हमेशा हमको होश था,
पर इस जहाँ के लोग लगे- बेहोश से।

तेरी चाहत

नवम्बर 19, 2005 को 8:36 अपराह्न | Posted in Uncategorized | 2 टिप्पणियाँ

तेरी चाहत का असर ऐसा हुआ,
मैं तुम्हारे प्यार में शायर हुआ।

मैं तो पहले से ही कुछ बदनाम था ,
जुड़ा तेरा नाम तो बदतर हुआ।

दिल में तेरे जगह थी मेरे लिये,
तेरी रुसवाई से मैं बेघर हुआ।

तू भी तड़पा था बहुत या के नहीं,
जब मेरे सीने में एक ख़ंज़र हुआ।

तेरी फिक्रों में गुज़रता वक़्त है,
कब मैं तेरे ख़्याल से बाहर हुआ।

काम का ब्लॉग

नवम्बर 18, 2005 को 4:23 अपराह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

जी हाँ, आज मैंने अपने आधिकारिक (official) लैपटॉप पर भी हिन्दी इंस्टॉल् कर ली और यह कार्यालय से मेरा पहला लेख है। आज यहां एक अंतरराष्ट्रीय पकवान समारोह का आयोजन किया गया था। आज विभिन्न देशों के पकवान खाने को मिले।

अक्रम विचार

नवम्बर 17, 2005 को 10:30 अपराह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

क्या लिखूँ?

पतझड के रंग

नवम्बर 17, 2005 को 7:39 अपराह्न | Posted in Uncategorized | 2 टिप्पणियाँ

कुछ सप्ताह पहले मैंने यह तस्वीर अपने सेलफोन द्वारा ली थी।

कौन सा कुंजीपटल?

नवम्बर 17, 2005 को 7:37 अपराह्न | Posted in Uncategorized | 1 टिप्पणी

मैं आप लोगों से सलाह लेना चाहता हूँ इस बारे में कि हिन्दी का कौन सा कुंजीपटल सीखा जाये। मैं अभी तो ट्रांस्लिटेरशन वाला इस्तेमाल करता आया हूँ। कुछ दिन इंस्क्रिप्ट इस्तेमाल करने की कोशिश की पर उसमें ढ़ , ड़ इत्यादि लिखने का तरीक नहीं समझ में आया, तो फिर से वापस आ गया ट्रंस्लिटरेशन मोड में । बहुत टाइप करना पड़ता है। कोई सहयता कर सकता है मेरी?

बहुत दिनों बाद

नवम्बर 17, 2005 को 7:39 पूर्वाह्न | Posted in Uncategorized | टिप्पणी करे

जी हाँ, कई हफ्तों से यह ब्लॉग सूना सूना पड़ा था…ब्लॉगर में किसी समस्या के कारण यहां कुछ दिख नहीं रहा था। जीतू जी को धन्यवाद जिन्होंने समस्या का समाधान बताया। क़ुछ दिनों के लिये मैं याहू 360 पर चला गया था…पर वहां इतना मज़ा नहीं आया। खैर, अब आप लोगों के आशीर्वाद से यहां पर डेरा फिर से जम गया है। अभी तो कार्यालय पर जाने का समय हो गया है….नमस्ते।

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