नव-वर्ष : एक कविता

दिसम्बर 31, 2006 को 1:30 पूर्वाह्न | Posted in कविता, समसामयिक | 3 टिप्पणियाँ

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नए वर्ष का कर अभिनंदन,

हम अपनी नौका को लेकर –

चलें नए पानी में खेने,

भू्लें विगत वर्ष का क्रंदन ।

 इस वसुधा का ध्यान रखेंगे,

देश-धर्म का मान करेंगे,

चहुंदिशि शांति रहेगी एवं –

प्रतिपल मानवता का वंदन। 

हर हाला हम पी जाएंगे,

हर एक पल हम जी जाएंगे,

हार नहीं मानेंगे फिर भी,

समय सर्प है – हम हैं चंदन।

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नए साल के ‘रिज़ाल्यूशन्स’

दिसम्बर 31, 2006 को 1:20 पूर्वाह्न | Posted in मनोरंजन, समसामयिक, हास्य-व्यंग्य | 7 टिप्पणियाँ

चूंकि आप अपने ‘रिज़ाल्यूशंस’ की लिस्ट बना ही रहे हैं तो मैंने आपकी सहायता के लिये नीचे एक सूची दी है, जो कि आप (हर साल) उपयोग में ला सकते हैं –

१. ब्लागिंग बन्द!

२. रोज़ ‘जिम’ (व्यायाम-कक्ष) / ‘योगा’ या सुबह की सैर के लिये जाना

३. ‘डाइट’ पर ‘कंट्रोल’ करना – मिठाइयाँ और ‘जंक फ़ूड’ इत्यादि कम!

४.  कार्य-स्थल (ऑफ़िस) में अपने काम पर ज़्यादा ‘फ़ोकस’ और ‘वाटर-कूलर डिस्कशन्स’ पर कम :-)!

५. नए साल में सारे ‘बिलों’ का समय पर भुगतान

६.  नए साल में सारी ई-मेल्स का समय पर ज़वाब

७. नए साल में एक नए शगल/’हॉबी’/विधा/खेल में मास्टरी

८. अगले साल ‘नो प्रोक्रैस्टिनेशन’ याने आज का काम कल पर टालना बंद

९. (नोट: इस ‘रिज़ाल्यूशन’ के बारे में कल सोचता हूँ)

१०. अगले साल के लिये ‘रिज़ाल्यूशंस’ बनाना (देखें – उपरोक्त बिन्दु १ से ९)

नए वर्ष – बीते पल

दिसम्बर 31, 2006 को 12:40 पूर्वाह्न | Posted in मौज़-मस्ती, समसामयिक | 4 टिप्पणियाँ

नव वर्ष के लिये आप सबको हार्दिक मंगलकामनाएं!

सोच रहा था कि क्या लिखूं, तभी सोचा कि मैंने अपने पिछले दस सालों में लोगों को ‘हैप्पी न्यू इयर’  किन-किन शहरों में बोले हैं, और  कैसे – तो यह रही एक संक्षिप्त झलक:

१. १९९७ – लखनऊ (नई नौकरी शुरू करने के पहले घर पर छुट्टियाँ, शायद हमेशा की तरह दूरदर्शन पर बीते वर्ष की झलकियां या नव वर्ष का ‘स्पेशल’ प्रोग्राम देखा )

२. १९९८ – पूना (अमेरिका स्थानांतरण के पहले की तैयारियाँ, शायद किसी रेस्टोरेंट में दोस्तों के साथ)

३. १९९९ – लखनऊ ( घर पर छुट्टियाँ, अमेरिका यात्रा की तैयारियाँ)

४. २००० – सैन फ़्रान्सिस्को ( मौज – मस्ती, ‘वाई -२के बग’ और नई सदी का स्वागत, एस. एफ़.  शहर का ज़श्न दोस्तों के साथ)

५. २००१ – लास वेगास  ( मौज – मस्ती *2, २००० का क्रिसमस भी यहीं ‘मनाया’ था, ५ दिन बाद फ़िर वापस आया! यह मेरा अभी तक देखा हुआ सबसे रोमांचक नव वर्ष स्वागत समारोह है)

६,७,८,९ : २००२,२००३, २००४, २००५ – (बैंगलोर/दक्षिण भारत के किसी क्लब/रेज़ार्ट या रेस्टोरेंट्स में परिवार के साथ समय बिताया)

८. २००६ – न्यू जर्सी (अमेरिका, घर में बैठकर परिवार के साथ टीवी पर टाइम्स स्क्वायर का नववर्ष समारोह देखा)

 आशा है आप भी अपने पिछले नव वर्षों के बारे में संक्षेप/विस्तार से बताएंगे, कुछ नहीं तो ऐसी ही एक छोटी सी लिस्ट ही सही!

हालिडे शापिंग – पैसे कैसे बचाएँ

दिसम्बर 17, 2006 को 1:43 पूर्वाह्न | Posted in Uncategorized | 4 टिप्पणियाँ
  1. पैसे खर्च न करें
  2. यदि #1 संभव न हो तो नं ३ से 10 तक आज़माएं
  3. सभी बड़े स्टोर्स और निर्माताओं की वेबसाइट पर जाकर उनकी ई-मेल मेलिंग लिस्ट में सब्स्क्राइब करें। मेरा अनुभव है कि आजकल ई-मेल मार्केटिंग में अधिक डील्स/कूपन्स मिल रहे हैं।
  4. ‘डील्स’ की वेब्साइटों’ पर नज़र रखें (slickdeals.net, edealinfo.com, deals2buy.com इत्यादि)। इनकी आर एस एस फ़ीड्स सब्स्क्राइब कर लें।
  5. रविवारीय अख़बार में आने वाले कूपनों को प्रयोग करने की आदत डालें। याद रखें के कुछ स्टोर मैन्युफ़ैक्चर कूपनों को २ य ३ गुना भी करते हैं (सावधान रहें कहीं वस्तु की कीमत बढ़ा तो नहीं दी गई है)
  6. बड़े स्टोर्स में सप्ताहन्तों के बजाय वीकडेज़ में जो सेल लगती है, उसमें अक़्सर भाव बहुत कम रहतें हैं।
  7. यह कहा जाता है कि २४ दिसम्बर की शाम को वस्तुओं केभाव सबसे अधिक रहते हैं – अपनी गिफ़्ट शापिंग इससे पहले खत्म कर लें।
  8. २६ दिसंबरकी सेल पर नज़र रखिये। इस दिन चीज़ों के दाम बहुत गिरने की सम्भावना है – बहुत से लोग अगले वर्ष के लिये इस दिन वस्तुएं खरीद लेते हैं।
  9. सम्भव हो सके तो अपनी ‘विश लिस्ट’ बना लें और लिख लें कि आपका ‘टार्गेट प्राइस (उचित मूल्य) क्या है।
  10. आप इस बारे में अपने विचार हमें बताएं।

आज का विचार

दिसम्बर 17, 2006 को 1:03 पूर्वाह्न | Posted in Uncategorized | 2 टिप्पणियाँ

“यदि हममें (प्रयत्न करने के बाद) थोड़ी सी भी ऊर्जा बाक़ी है – तो इसका मतलब है कि हमने अपने कार्य को ठीक ढंग से नहीं किया”

– रोले़क्स घड़ी के एक विज्ञापन से

वापसी

दिसम्बर 9, 2006 को 1:05 पूर्वाह्न | Posted in Uncategorized | 3 टिप्पणियाँ

बहुत दिनों बाद कुछ लिखने का प्रयत्न कर  रहा हूँ। वैयक्तिक कारणोंवश कुछ सोचने-लिखने का मौक़ा ही नहीं मिल रहा था।  यह वर्ष ऐसा बीता कि जिसके बारे में लिखने के लिये शब्द ही पर्याप्त नहीं…

आज इस वर्ष का पहला हल्का-फ़ुल्का हिमपात हुआ( स्नो-फ़्लरीज़) । यह देखकर याद आया कि मैंने अपने चिट्ठे पर पिछले वर्ष  हिमपात के कुछ चित्र डाले थे…इसी से याद आया कि बहुत दिनों से मैंने आप लोगों से बात नहीं की…याने इस चिट्ठे पर कुछ लिखा नहीं।

मैं जिस अनुवादक साफ़्ट्वेयर के बारे में ज़िक्र कर रहा था…आज मैने उस पर बहुत दिनों बाद फिर से कुछ काम किया…अभी मैंने डाटाबेस डिज़ाइन में थोड़ा परिवर्तन किया है, और इस प्रोग्राम को डेस्क्टाप से वेब बेस्ड बना दिया है…वैसे काम अभी शैशवावस्था में है, फ़िर भी यदि किसी को कोई प्रश्न को तो टिप्पणी ज़रूर करें।

आज बहुत दिनों बाद जीतू और फ़ुरसतिया के कुछ लेख  पढ़, और बहुत आनन्द आया….! हिन्दी चिट्ठाकारी में अनगिनत नए लेखक देखकर भी बहुत खुशी हुई।

यहाँ पर क्रिस्मस की खरीदारी अपनी चरम सीमा पर है..अखबार ,टीवी वगैरह ‘सेल’ से रंग मे‍ सराबोर हो गये हैं! मज़े की बात यह है के हर रोज़ सेल होती है और लिखा होता है ‘वन डे’ आन्ली! वैसे ‘धन्यवाद दिवस’ के बाद वाले ‘काले शुक्रवार’  पर काफ़ी काम के सामान काफ़ी सस्ते मिल रहे थे।

ज़ल्द ही आगे  लिखने का प्रयत्न करता हूं। नमस्कार!

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