नव-वर्ष : एक कविता

दिसम्बर 31, 2006 को 1:30 पूर्वाह्न | Posted in कविता, समसामयिक | 3 टिप्पणियाँ

boat-at-sunrise.jpg

नए वर्ष का कर अभिनंदन,

हम अपनी नौका को लेकर –

चलें नए पानी में खेने,

भू्लें विगत वर्ष का क्रंदन ।

 इस वसुधा का ध्यान रखेंगे,

देश-धर्म का मान करेंगे,

चहुंदिशि शांति रहेगी एवं –

प्रतिपल मानवता का वंदन। 

हर हाला हम पी जाएंगे,

हर एक पल हम जी जाएंगे,

हार नहीं मानेंगे फिर भी,

समय सर्प है – हम हैं चंदन।

3 टिप्पणियाँ »

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  1. हाला मत पियो लाला!

  2. सही है. पूर्ण आशा के साथ स्वागत करें नये साल का. शुभकामनायें.

  3. आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनएं


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