नए साल के ‘रिज़ाल्यूशन्स’

दिसम्बर 31, 2006 को 1:20 पूर्वाह्न | Posted in मनोरंजन, समसामयिक, हास्य-व्यंग्य | 7 टिप्पणियाँ

चूंकि आप अपने ‘रिज़ाल्यूशंस’ की लिस्ट बना ही रहे हैं तो मैंने आपकी सहायता के लिये नीचे एक सूची दी है, जो कि आप (हर साल) उपयोग में ला सकते हैं –

१. ब्लागिंग बन्द!

२. रोज़ ‘जिम’ (व्यायाम-कक्ष) / ‘योगा’ या सुबह की सैर के लिये जाना

३. ‘डाइट’ पर ‘कंट्रोल’ करना – मिठाइयाँ और ‘जंक फ़ूड’ इत्यादि कम!

४.  कार्य-स्थल (ऑफ़िस) में अपने काम पर ज़्यादा ‘फ़ोकस’ और ‘वाटर-कूलर डिस्कशन्स’ पर कम :-)!

५. नए साल में सारे ‘बिलों’ का समय पर भुगतान

६.  नए साल में सारी ई-मेल्स का समय पर ज़वाब

७. नए साल में एक नए शगल/’हॉबी’/विधा/खेल में मास्टरी

८. अगले साल ‘नो प्रोक्रैस्टिनेशन’ याने आज का काम कल पर टालना बंद

९. (नोट: इस ‘रिज़ाल्यूशन’ के बारे में कल सोचता हूँ)

१०. अगले साल के लिये ‘रिज़ाल्यूशंस’ बनाना (देखें – उपरोक्त बिन्दु १ से ९)

पहेली के उत्तर

जुलाई 11, 2006 को 10:17 अपराह्न | Posted in मनोरंजन | टिप्पणी करे

पहेली के उत्तर यह रहे:

१. “मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता”  – सन्तूर सोप
२. “पहला प्यार, लाए जीवन में बहार…” – जय साबुन
३. “राजू, तुम्हरे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं” – डाबर दन्तमंजन
४. “… इसके झाग ने जादू कर दिया…” – निरमा डिटर्जेन्ट टिकिया
५. “…खोलो दबाओ, ब्रश पर लगाओ…मोड कर रखो, फिर काम में लाओ..” – कोल्गेट का छोटा पैकेट
६. “ज़माने के साथ चलो, … अपनाओ” – वैमिकोल (सईद जाफ़री का ऐड)
७. “तन्दुरुस्ती की रक्षा करता है…”- लाइफ़बॉय
८. “राजू(?) की मां ललिता जी ठीक कहती हैं..” – सर्फ़
९. (अन्ग्रेज़ी में) “सर…व्हिच शेविंग क्रीम डू यू यू़ज़्?” – गोदरेज शेविंग क्रीम
१०. “…दा ज़वाब नहीं” – पामोलिव
११. “बच्चे बूढे और जवान, पहनें… बनियान” – यंग इंडिया

१२. “ये अन्दर की बात है” –लक्स अन्डरवियर बनियान
१३. “… की खरीददारी में ही समझदारी है” – सर्फ़
१४. “दूरियाँ नज़दीकियाँ बनीं…” – कोल्गेट टूथ्पेस्ट
१५. “…आयुर्वेदिक जडी-बूटियों से बना सम्पूर्ण स्वदेशी…” – विक्को वज्रदन्ती
१६. “…बस दो मिनट…”  – मैगी
१७. “जो बीवी से करते प्यार..वो …से कैसे करें इन्कार!” –प्रेस्टिज
१८. “… की सीटी बजी, खुशबू ही खुशबू उडी..” – हॉकिन्स
१९. “…की क्या खूब लिखाई…” – नटराज
२०. “…हाँ स्पेशल है वो…मेरी ज़िन्दगी…” – रेड लेबल
२१. “…दाम में कम, काम में दम…, …से धोते कपडे हम!” – प्लस
२२. “हल्दी चंदन का उबटन लगायें सखियाँ…तेरी काया को कंचन बनायें सखियाँ…” – विक्को टर्मरिक
२३. “…सोना सोना, अहा …” – रेक्सोना
२४. “उसकी कमीज़ मेरी कमीज़ से ज़्यादा सफेद कैसे..” – सुपर  रिन

पहला ईनाम: निधि

दूसरा ईनाम:  सागर चन्द नाहर

बूझो तो जानें!

जुलाई 4, 2006 को 11:13 अपराह्न | Posted in मनोरंजन | 10 टिप्पणियाँ

नीचे दूरदर्शन पर आने वाले कुछ पुराने विज्ञापनों की कुछ पन्क्तियां दी हुई हैं- अपनी यादों को टटोलिये, और उनसे सम्बन्धित उत्पाद का नाम बताइये |
१. “मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता”
२. “पहला प्यार, लाए जीवन में बहार…”
३. “राजू, तुम्हरे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं”
४. “… इसके झाग ने जादू कर दिया…”
५. “…खोलो दबाओ, ब्रश पर लगाओ…मोड कर रखो, फिर काम में लाओ..”
६. “ज़माने के साथ चलो, … अपनाओ”
७. “तन्दुरुस्ती की रक्षा करता है…”
८. “राजू(?) की मां ठीक कहती हैं..”
९. (अन्ग्रेज़ी में) “सर…व्हिच शेविंग क्रीम डू यू यू़ज़्?”
१०. “…दा ज़वाब नहीं”
११. “बच्चे बूढे और जवान, पहनें… बनियान”
१२. “ये अन्दर की बात है”
१३. “… की खरीददारी में ही समझदारी है”
१४. “दूरियाँ नज़दीकियाँ बनीं…”
१५. “…आयुर्वेदिक जडी-बूटियों से बना सम्पूर्ण स्वदेशी…”
१६. “…बस दो मिनट…”
१७. “जो बीवी से करते प्यार..वो …से कैसे करें इन्कार!”
१८. “… की सीटी बजी, खुशबू ही खुशबू उडी..”
१९. “…की क्या खूब लिखाई…”
२०. “…हाँ स्पेशल है वो…मेरी ज़िन्दगी…”
२१. “…दाम में कम्, काम में दम…, …से धोते कपडे हम!”
२२. “हल्दी चंदन का उबटन लगायें सखियाँ…तेरी काया को कंचन बनायें सखियाँ…”
२३. “…सोना सोना, अहा …”
२४. “उसकी कमीज़ मेरी कमीज़ से ज़्यादा सफेद कैसे..”

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